रिपोर्ट :- धर्मेन्द्र कुमार
चंदौली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में शामिल आधुनिक रेलवे और “अमृत भारत” जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के बीच चंदौली जनपद में हाईवे किनारे खुले में रखे लोकोमोटिव बॉडी शेल चर्चा का विषय बने हुए हैं। चंदौली के नौबतपुर बिहार बॉर्डर के पास पिछले करीब 15 दिनों से सड़क किनारे टेंट के नीचे कई लोकोमोटिव बॉडी शेल खड़े होने की जानकारी सामने आई है, जिसे लेकर स्थानीय लोगों और राहगीरों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
बताया जा रहा है कि भारी-भरकम लोकोमोटिव बॉडी संरचनाएं हाईवे किनारे अस्थायी तरीके से रखी गई हैं। इन पर तिरपाल और टेंट डालकर मरम्मत अथवा निर्माण जैसा कार्य किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर करोड़ों रुपये की रेलवे परियोजनाओं से जुड़ी सामग्री खुले हाईवे किनारे क्यों पड़ी है? क्या यह रेलवे की आधिकारिक प्रक्रिया का हिस्सा है या फिर किसी प्रकार की लापरवाही अथवा अनियमितता का मामला?
स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े और संवेदनशील रेलवे ढांचे को खुले स्थान पर रखना सुरक्षा की दृष्टि से भी गंभीर विषय है। लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि कहीं ये बॉडी शेल असली सामग्री से बने हैं या गुणवत्ता को लेकर कोई गड़बड़ी तो नहीं है। हालांकि अभी तक रेलवे या संबंधित विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
वहीं, क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि क्या इन लोकोमोटिव बॉडी शेल का संबंध बनारस लोकोमोटिव वर्क से है या इन्हें किसी अन्य यूनिट से लाया गया है। रेलवे सूत्रों के अनुसार अमृत भारत और अन्य आधुनिक इंजनों के निर्माण में कई निजी और सरकारी इकाइयों की भागीदारी रहती है, लेकिन हाईवे किनारे इस तरह बॉडी शेल खड़े होने से लोगों के मन में सवाल खड़े हो गए हैं।
फिलहाल पूरे मामले को लेकर स्थानीय प्रशासन और रेलवे अधिकारियों की चुप्पी बनी हुई है। अब देखना होगा कि रेलवे विभाग इस मामले पर क्या स्पष्टीकरण देता है और हाईवे किनारे रखे गए इन लोकोमोटिव बॉडी शेल की वास्तविक स्थिति क्या है।

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