रिपोर्ट : तारिक़ इक़बाल / झाँसी
झाँसी। बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के 31वें दीक्षांत समारोह के उपलक्ष्य में ललित कला संस्थान द्वारा आयोजित सात दिवसीय राष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला 'बुंदेली वसुधा' का समापन समारोह सम्पन्न हुआ। कार्यशाला में देशभर से आए 50 से अधिक कलाकारों और विद्यार्थियों ने बुंदेलखण्ड की लोक संस्कृति, लोकजीवन, स्थापत्य कला और प्राकृतिक सौंदर्य को अपनी कलाकृतियों में साकार किया।
समापन समारोह में कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने कहा कि विद्यार्थियों की कलाकृतियाँ बुंदेलखण्ड की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत दस्तावेज हैं। उन्होंने युवाओं से कला को रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने का आह्वान किया। मुख्य अतिथि प्रो. मुन्ना तिवारी ने कहा कि ऐसी कार्यशालाएँ विद्यार्थियों की सृजनात्मक क्षमता को नई दिशा देती हैं।
कार्यशाला समन्वयक डॉ. श्वेता पाण्डेय ने बताया कि सात दिनों तक चली इस कार्यशाला में बुंदेली संस्कृति और ग्रामीण जीवन को चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्ति दी गई। समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया।



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