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मानव तस्करी और लैंगिक शोषण के खिलाफ जागरूकता का बिगुल, DLSA ने बताया पीड़ितों के अधिकार और कानूनी सुरक्षा

रिपोर्ट :- तारिक इकबाल झांसी 

झांसी। जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) झांसी, श्रीमती कमलेश कच्छल के संरक्षण तथा सिविल जज (सीनियर डिवीजन)/सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती ईशा त्रिपाठी के निर्देशन में मंगलवार को "मानव तस्करी और लैंगिक शोषण के विरुद्ध अधिकार" विषय पर एक वृहद विधिक जागरूकता एवं साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।

शिविर में कानूनी विशेषज्ञों ने उपस्थित जनसमूह एवं विधि के छात्र-छात्राओं को मानव तस्करी और लैंगिक शोषण जैसी गंभीर सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध उपलब्ध संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों की विस्तृत जानकारी दी गई। वक्ताओं ने बताया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद-23 मानव तस्करी, बेगार और किसी भी प्रकार के जबरन श्रम पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है तथा ऐसे कृत्य कानूनन दंडनीय अपराध हैं।

कार्यक्रम में लीगल एड डिफेंस काउंसिल (LADC) के अधिवक्ता दीपक मणि एवं अजय कुमार ने मुख्य वक्ता के रूप में प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम (ITPA), पॉक्सो एक्ट (POCSO) तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अंतर्गत मानव तस्करी और लैंगिक शोषण के मामलों में निर्धारित कठोर एवं गैर-जमानती दंडात्मक प्रावधानों की जानकारी दी।

वक्ताओं ने कहा कि गरीबी, अशिक्षा और जागरूकता के अभाव का लाभ उठाकर महिलाओं और बच्चों को शिकार बनाने वाले तस्करी गिरोहों पर अंकुश लगाने में आम नागरिकों की सतर्कता और सहभागिता बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें। इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के वरिष्ठ लिपिक आदिल जाफरी भी मौजूद रहे।

प्राधिकरण की ओर से बताया गया कि यदि किसी महिला, बच्चे या असहाय व्यक्ति के साथ जबरन मजदूरी, बंधुआ श्रम या लैंगिक उत्पीड़न की घटना सामने आती है तो उसकी सूचना तत्काल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को दी जाए। प्राधिकरण पीड़ितों को रेस्क्यू, निःशुल्क कानूनी सहायता, सरकारी अधिवक्ता, पुनर्वास सुविधाएं तथा उत्तर प्रदेश पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

वहीं, शिविर में बड़ी संख्या में अधिकार मित्रों एवं विधि छात्रों ने भाग लिया और मानव तस्करी एवं लैंगिक शोषण मुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।

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