गोरखपुर। प्रदेश के संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में अल्प मानदेय पर कार्यरत शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए 'संस्कृत शिक्षक उत्थान समिति' ने प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी कड़ी में समिति के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और मानदेय शिक्षकों के नियमितीकरण (Regularization) की पुरजोर मांग उठाई।
अल्प मानदेय के बदले स्थायी भविष्य की मांग
मुलाकात के दौरान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राजीव मिश्रा ने मुख्यमंत्री के समक्ष मानदेय शिक्षकों की समस्याओं को प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि संस्कृत विद्यालयों में तैनात शिक्षक बेहद कम मानदेय में भी पूरी निष्ठा के साथ प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और देववाणी संस्कृत को आगे बढ़ा रहे हैं। ऐसे में इन शिक्षकों के जीवन स्तर को सुधारने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नियमितीकरण की प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री का आश्वासन: "संस्कृत शिक्षकों की जिम्मेदारी हमारी"
प्रतिनिधिमंडल की बातों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद गंभीरता और संवेदनशीलता से सुना। शिक्षकों को आश्वस्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा:
"आप सभी पूरी ऊर्जा के साथ विद्यालयों में पठन-पाठन के स्तर को सुधारने और छात्र संख्या बढ़ाने पर मजबूती से जोर दें। संस्कृत शिक्षकों के हितों की रक्षा करना और उनकी जिम्मेदारी उठाना हमारी सरकार का दायित्व है।"
मुख्यमंत्री के इस सकारात्मक रुख से मानदेय शिक्षकों में एक नई उम्मीद जगी है।
प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल
इस महत्वपूर्ण बैठक के अवसर पर संगठन के प्रदेश संरक्षक श्याम प्रकाश द्विवेदी, प्रदेश कोषाध्यक्ष अजय शुक्ला और महिला जिलाध्यक्ष ज्योति सिंह मुख्य रूप से उपस्थित रहीं। सभी पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को संस्कृत शिक्षा की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया और उम्मीद जताई कि सरकार जल्द ही इस दिशा में कोई ठोस और ऐतिहासिक कदम उठाएगी

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