Report:Arbaz khan
भीषण गर्मी और 48 डिग्री तापमान के बीच जहां जिला प्रशासन हीट वेव से बचाव के बड़े-बड़े इंतजामों का दावा कर रहा है… वहीं लोकतंत्र का चौथा स्तंभ यानी पत्रकार खुद गर्मी से जूझने को मजबूर हैं।बांदा कलेक्ट्रेट परिसर से सामने आई तस्वीरें कई सवाल खड़े कर रही हैं… जहां पत्रकारों के बैठने के लिए न टेंट है… न शेड… और न ही पेयजल की समुचित व्यवस्था।बांदा में इन दिनों भीषण गर्मी का कहर जारी है। तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। जिला प्रशासन ने शहर में जगह-जगह प्याऊ, शेड और पशु-पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था की है। लोगों को घर से बाहर न निकलने की एडवाइजरी भी जारी की गई है लेकिन इन व्यवस्थाओं के बीच खबरों की कवरेज करने वाले पत्रकार खुद बदहाल नजर आ रहे हैं। कलेक्ट्रेट परिसर में कवरेज के लिए आने वाले पत्रकार चिलचिलाती धूप में बरगद के पेड़ के नीचे खड़े रहने को मजबूर हैं।पत्रकारों के बैठने के लिए न कोई टेंट लगाया गया है और न ही शेड की व्यवस्था की गई है। इतना ही नहीं… मीडिया वाहनों की पार्किंग तक के लिए कोई निर्धारित स्थान नहीं है।
“हीट वेव में जिला प्रशासन ने इंतजाम तो किए, मगर पत्रकारों की सुध नहीं ली। जब पूरा प्रशासन शहर की चिंता कर रहा है तो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को क्यों भूल गया? 48 डिग्री में पत्रकार खबर कवर कर रहे हैं। उनके लिए कम से कम शेड और पानी की व्यवस्था तो होनी चाहिए।”पत्रकारों का कहना है कि भीषण गर्मी के चलते कई साथियों की तबीयत भी बिगड़ रही है। ऐसे में पत्रकारों ने जिला प्रशासन से तत्काल शेड और पेयजल की व्यवस्था कराने की मांग की है।अब देखना होगा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की इस परेशानी पर जिला प्रशासन कब तक संज्ञान लेता है…

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