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गायत्री शक्तिपीठ चित्रकूट में आयोजित हुआ शिक्षक गरिमा शिविर, ग्रामोदय विद्यालय के कुलपति ने शिक्षकों को किया सम्मानित

रिपोर्ट: पवन पाण्डेय (चित्रकूट)

चित्रकूट। गायत्री शक्तिपीठ चित्रकूट में शिक्षक गरिमा शिविर का दिव्य आयोजन संपन्न हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में कुलपति महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय चित्रकूट प्रोफेसर आलोक चौबे तथा अध्यक्षता हरि मोहन सिंह ने किया। डॉक्टर रामनारायण त्रिपाठी संचालक गायत्री शक्ति चित्रकूट ने आगन्तुक अतिथियों का शब्द पुष्पों के द्वारा स्वागत भाषण किया और गायत्री परिवार के उद्देश्य तथा शिक्षक गौरव गरिमा के साथ समाज में परिवर्तन लाने के मुख्य आधार के रूप में है भावपूरित ज्ञान विज्ञान समझाया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चौबे ने कहा बहुत सारे कानून के आधार पर हम बंधे हुए हैं लेकिन फिर भी हम बहुत कुछ स्वतंत्र हैं जिसके आधार पर शिक्षक छात्रों के अंदर अनुकूल परिवर्तन उत्पन्न कर सकते हैं अपने प्रेम व्यवहार और अपनी गरिमा का आभास होने पर पूर्व जन्म जैसा व्यवहार कर छात्रों के जीवन में परिवर्तन आसानी से ला सकते हैं ।मुख्य वक्ता के रूप में गायत्री तीर्थ शांतिकुंज हरिद्वार के प्रतिनिधि एवं प्रयाग यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सब्यसाची त्रिपाठी ने कहा गुरुओं में प्रेम ऐसा था कि शिष्य सहज बदलता चला जाता था। परम बंदनीया माता जी एवं गुरुदेव के प्रेम ने विश्व परिवार बनाया ,यही प्रेम हमारे आदर्श गुरुओं में होता था तो उससे जीवन स्वयं बदलता चला जाता था। आज आवश्यकता प्रेम की है हर शिक्षक छात्र के जीवन की समस्या को समझे। नवीन परिस्थितियों में तालमेल बिठाने एवं राष्ट्र निर्माण के आवश्यक सूत्रों को उनके जीवन में बिठाने के लिए पहले शिक्षक को अपना आदर्श चरित्र रखना होगा। अध्यक्ष उद्बोधन में हरिमोहन सिंह ने कहा अब गुरु नहीं शिक्षक होते हैं शिक्षा देकर अपना कर्तव्य इतिश्री मान लेते हैं ।शिक्षक को अपना कर्तव्य बोध होने के साथ ही छात्र के जीवन में कर्तव्य को करना है इसके लिए भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार द्वारा आयोजित होती है जिससे बच्चा सभ्य ही नहीं संस्कारित बनता है। इसमें सभी आदर्श शिक्षकों की सहभागिता हो। हर विद्यालय में परीक्षा के माध्यम से यह ज्ञान छात्र एवं उनके अभिभावकों तक पहुंचे ।अनेक विद्वानों ने वर्तमान की ज्वलन्त समस्याओं एवं शिक्षकों के अवमूल्यन की पीड़ा भी उठाई लेकिन कुछ विद्वानों ने यह बात भी कहीं इन परिस्थितियों के बाद भी हर शिक्षक का उत्तरदायित्व है कि वह समाज को नई दिशा दें। युवाओं में व्यसन, नशा एवं कुरीतियों को दूर करने के लिए योजनाबद्ध प्रयास करना होगा। कुल मिलाकर यह आयोजन बहुत ही अद्भुत और सफल रहा जिले के तमाम विद्वान शिक्षक संगठन एवं समाज में अपनी प्रमाणिक छवि रखने वाले शिक्षक उपस्थित हुए ।इनमें से मुख्य रूप से चित्रकूट जिले के जिला अध्यक्ष अखिलेश पांडे, जगदीश गौतम, जगतगुरु दिव्यांग विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग अध्यक्ष प्रमिला मिश्रा, डॉक्टर गोपाल मिश्रा ,जयदेव संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर मनोज द्विवेदी, पीएमश्री कंपोजिट विद्यालय कछारपुरवा की प्रधानाचार्य रचना यादव, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के जिला संयोजक जितेंद्र सिंह, संरक्षक विजय चंद्र गुप्ता, डॉक्टर संतोष मिश्रा, कालिका श्रीवास्तव ,सुरेंद्र पाल ग्रामोदय विद्यालय के प्राचार्य जितेंद्र श्रीवास्तव, एकल विद्यालय के संयोजक ओमप्रकाश, एकलव्य विद्यालय के प्राचार्य अशोक, रामनगर गायत्री विद्या मंदिर के संचालक राम लखन केसरवानी के साथ सभी शिक्षक, महाविद्यालय के सभी आचार्य धर्मेंद्र सिंह के नेतृत्व में , सेवा भारती के जिला महामंत्री राज किशोर शिवहरे ,प्रचार प्रमुख शंकर प्रसाद यादव, जगपालक यादव,डॉक्टर संग्राम सिंह युटा अध्यक्ष ,कमलेश कुमार त्रिपाठी , जिला समन्वक भवानीदीन यादव ,शिक्षा समिति के प्रबंधक अनूप तिवारी, प्राचार्य राजकुमार ओझा, जिला युवा संयोजक प्रमोद पटेल, शिवम मिश्रा, सुधीर द्विवेदी ,रामशरण शास्त्री, ,सुधा तिवारी, सत्यनारायण अग्रवाल, वंदना अग्रवाल सीधी, व चित्रकूट जनपद के अधिकांश विद्यालयों के प्राचार्य 200 की संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने गायत्री परिवार एवं गायत्री परिवार के विचारों को जानकर उसमें सहभागिता करने का संकल्प लिया। सभी को सहभागिता का प्रशस्ति पत्र एवं गायत्री मंत्र के दुपट्टे और साहित्य भेंट कर सम्मानित किया गया।

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