रिपोर्ट : तारिक़ इक़बाल / झाँसी
झांसी रेलवे वर्कशॉप के इतिहास में एक सुनहरा पन्ना जुड़ने जा रहा है रेलवे वर्कशाॅप के इंजीनियर अधिकारियों और कर्मचारी ने अपनी कड़ी मेहनत से माल गाड़ी में पीछे लगने वाले गार्ड कोच को ऐसा चमकाया की रेलवे के इतिहास में झाँसी रेल वर्कशॉप का नाम दर्ज हो गया।
दरअसल मालगाड़ी के पीछे लगे गार्ड कोच में अपनी ड्यूटी करने वाली कर्मचारियों को काफी दिक्कत होती थी। इस कोच में न तो लाइट थी, न मोबाइल चार्जर, न बैठने के लिए सही कुर्सी और न पंखे जैसी अन्य सुविधाएं। आजादी के करीब 76 साल बाद झाँसी के रेल वर्कशॉप के इंजिनीयरो ने उस कोच को सुविधाओ से लैस करने की सोची और कड़ी मेहनत के बाद इस काम को अंजाम दे डाला। तस्वीरे गवाह है कि मालगाड़ी के सबसे आखरी में लगने वाला ये गार्ड कोच में अब सोलर सिस्टम जैसी सुविधाओं के साथ लैस है।
आपको बता दें कि जब मालगाड़ी सुनसान जंगलों और अंधेरों में खड़ी होती थी तो ऐसी स्थिति में मालगाड़ी के पीछे लगे इस कोच में बैठे गार्ड को कई घंटों मुसीबतों का सामना करना पड़ता था। इस कोच में उस गार्ड के अलावा और कोई भी शख्स मौजूद नही होता था। यहां तक कि वायरलेस सेट भी डिस्चार्ज हो जाते थे। झांसी रेलवे वर्कशॉप द्वारा इस कोच में किये गए परिवर्तन के बाद अब देश की लगभग सभी मालगाड़ियों में ऐसे कोच लगाने की तैयारी शुरू हो गयी है।

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