रिपोर्ट : चंद्रभान यादव
जशपुर :- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले की ग्रामीण महिलाएँ आज आत्मनिर्भरता की सशक्त मिसाल बनकर उभर रही हैं। कभी सीमित संसाधनों में जीवन यापन करने वाली महिलाएँ अब आर्थिक, सामाजिक और सामुदायिक रूप से मजबूत होकर अपने परिवार और समाज में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। इसके पीछे महतारी वंदन योजना, महतारी सदन और ई-रिक्शा वितरण जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं का बड़ा योगदान है।जिले की दो लाख से अधिक महिलाओं के खातों में महतारी वंदन योजना के तहत अब तक 448 करोड़ रुपये की राशि सीधे हस्तांतरित की जा चुकी है। इस आर्थिक सहयोग से महिलाओं को न केवल आय का संबल मिला है, बल्कि उनके आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कई महिलाएँ स्वरोजगार से जुड़कर परिवार की आय बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
’‘महतारी सदन’ बना महिलाओं के संगठन और प्रशिक्षण का केंद्र
ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में महतारी सदन एक महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आया है। महिलाओं को सुरक्षित, सुविधायुक्त और संगठित मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से साय सरकार ने जशपुर जिले में 18 महतारी सदन भवनों की स्वीकृति दी है। प्रत्येक भवन के लिए 29 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।कुल 5 करोड़ 22 लाख रुपये की लागत से बनने वाले ये भवन महिला स्व-सहायता समूहों के लिए प्रशिक्षण, बैठक, कौशल विकास और आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बनेंगे।इन महतारी सदनों में महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई, बुनाई, हस्तशिल्प, मशरूम उत्पादन, घरेलू उद्योग, पैकेजिंग और विपणन जैसी गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे महिलाओं में सामूहिक निर्णय क्षमता, नेतृत्व गुण और सामाजिक एकता को मजबूती मिल रही है।
जिले के बगीचा विकासखंड के कुर्राेग और रंगले, पत्थलगांव के लुड़ेग, बागबहार और सुरंगपानी, मनोरा के सोनक्यारी और मनोरा, जशपुर के लोखंडी और आरा, कुनकुरी के ढोढ़ीबहार, केराडीह और नारायणपुर, कांसाबेल के बगिया, दोकड़ा और बटईकला, तथा फरसाबहार के केरसई, पंडरीपानी और गारीघाट पंचायतों में इन भवनों का निर्माण किया जा रहा है।
महिलाओं की जुबानीकृबदली जिंदगी की कहानी
कुर्राेग (बगीचा) की सावित्री भगत बताती हैं कि पहले प्रशिक्षण के लिए दूर जाना पड़ता था, लेकिन अब गांव में ही सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।सोनक्यारी (मनोरा) की रजनी पैंकरा कहती हैं कि महतारी सदन महिलाओं के लिए सिर्फ भवन नहीं, बल्कि सशक्तिकरण की नींव है।
ई-रिक्शा वितरण से महिलाओं को मिला नया आत्मसम्मान
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रक्षाबंधन के अवसर पर 12 स्व-सहायता समूहों की दीदियों को ई-रिक्शा प्रदान किए। आज ये महिलाएँ ई-रिक्शा चलाकर न केवल नियमित आय अर्जित कर रही हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधा भी सुलभ करा रही हैं।
तपकरा की राजकुमारी पैकरा कहती हैं कि ई-रिक्शा से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।छेरडांड की संगीता देवी बताती हैं कि अब वे आत्मविश्वास के साथ काम कर रही हैं।
ग्रामीण समाज में महिला सशक्तिकरण की नई कहानी
महतारी सदन और ई-रिक्शा जैसी योजनाएं मिलकर जशपुर जिले में महिला सशक्तिकरण की नई कहानी लिख रही हैं। महिलाएँ आज आर्थिक रूप से सक्षम, सामाजिक रूप से सम्मानित और आत्मनिर्भर बनकर उभर रही हैं। साय सरकार की ये पहलें न केवल वर्तमान, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणास्रोत सिद्ध हो रही हैं।



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